Tuesday, 13 October 2020

World students day 2020: विश्व मानक दिवस आज, मानक का रखा जाए ध्यान तो खुशनुमा हो सकता है जीवन

  World students day 2020: विश्व मानक दिवस आज, मानक का रखा जाए ध्यान तो खुशनुमा हो सकता है जीवन

vastu shastra (photo- Sumadhura Group)

आज विश्व मानक दिवस है। यह दिन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए मानकीकरण के महत्व के रूप में नियामकों, उद्योग और उपभोक्ताओं के बीच जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। माना जाता है कि मानकों के तकनीकी फायदे हैं और इससे उत्पादों तथा सेवाओं को बेहतर बनाने तथा इनसे जुड़े उद्योगों को अधिक कुशल बनाने में मदद मिलती है। क्योंकि हर व्यक्ति के जीवन में जागने से सोने तक तमाम तरह के उत्पाद और सेवाओं से पाला पड़ता है। यदि इनमें मानकों का उचित पालन न हो तो व्यक्ति का जीवन सुखमय की बजाए दुखमय हो जाता है। पेश है एक रिपोर्ट

इस दिन की शुरुआत मानकों के विकास संगठनों के भीतर स्वैच्छिक मानकों को विकसित करने वाले हजारों विशेषज्ञों के प्रयासों को सम्मान देने के लिए भी की गई। मंशा थी कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर वैश्विक मानकीकरण की दिशा में जो भी अच्छे प्रयास किए जा रहे हैं, उनका फायदा विकासशील देशों को भी मिलेगा। इससे न केवल उनके व्यापार में बढ़ोतरी होगी बल्कि सामाजिक−आर्थिक क्षेत्र में भी बदलाव आएगा। 
मानक के माध्यम से आज पूरा विश्व एक दूसरे से जुडा हुआ है। हमारा डेबिट, क्रेडिट कार्ड प्रत्येक एटीएम मशीन से हमारे लिए पैसे निकाल देता है।  किसी भी दुकान से हमारे लिए वस्तुएं  खरीद सकता है। जो बल्ब हम बाजार में कहीं से भी खरीदते हैं, वो हमारे घर में लगे होल्डर में फिट आता है। यही स्थिति टोस्टर के प्लग की होती है। यह सब मानको के कारण ही संभव हुआ है। मानकों से ही मशीन, पुर्जों तथा उत्पादों में आपस में तालमेल अत्यंत सरल हुआ है।
इस दिन को मनाने का एक और उद्देश्य है। अर्थव्यवस्थाओं के लिए मानकीकरण की आवश्यकता के प्रति जागरूकता फैलाना है। यह अंतर्राष्ट्रीय मानकीकरण संगठन (आईएसओ) के स्थापना दिवस के रूप में विश्व भर में मनाया जाता है। कम दाम में उत्तम गुणवत्ता के उत्पाद तैयार करने या सेवाएं देने के लिए प्रक्रियाओं को लागू करते हुए लक्ष्यों को हासिल करने की क्षमता ही दक्षता है। 
वर्तमान में उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता को बनाए रखना आसान नहीं है। बिना मेहनत के लिए लाखों करोड़ों की दौलत कमाना, रातों रात अमीर बन जाना, खरीदार के प्रति संवेदनहीनता जैसी प्रवृत्ति हावी हो रही हैं। इनके कारण आम आदमी के लिए कई बार मुश्किल हो जाती है। कुछ लोगों का तो जीवन ही बदल जाता है। 

जागने से सोने तक मानक
: सुबह जिस अलार्म से उठते हैं, कई बार उसके धोखा देने से लोगों को बड़ा नुकसान हुआ है।
: जिम में कसरत करते समय यदि उपकरण मानकों का नहीं है तो लेने के देने पड़ जाते हैं। 
: नाश्ते के लिए प्रयोग होने वाला टोस्टर कई बार हादसों को जन्म देता है। इसमें भी जरूरी हैं मानक।
: दांत मांजने के लिए प्रयोग होने वाला ब्रश कमतर मानक का है तो अच्छे भले दांत खराब हो जाते हैं। 
: ऑफिस या कारोबार तक जाने के लिए प्रयोग होने वाले वाहन की कमी से कई बड़े नुकसान हुए हैं। 
: जिस सड़क पर हम गुजरते हैं, उसके मानकों से कमतर होने के कारण हादसों को बल मिलता है। 
: जिस लिफ्ट में हम ऊपरी मंजिल तक जाते हैं, उसके मानकों की कमी हमें मुश्किल में डाल देती है। 
: जिस कंप्यूटर पर हम काम करते हैं, उसका मानकों से कमतर होने से हमारा कीमती समय खराब हो जाता है। 
: जिस भोजन को हम स्वास्थ्यवर्द्धक समझ कर ग्रहण करते हैं। उसका सब स्टैंडर्ड होना हमें बीमार करता है। 
: बिजली की फिटिंग में कमी कई बार हमारी सुरक्षा को खतरे में डाल देती है। इसके बहुत उदाहरण है। 

घड़ी की कमी से नुकसान
कुछ अरसा पहले की बात है। मुझे एक सेमिनार के लिए चेन्नै जाना था। सुबह दिल्ली से फ्लाइट पकड़नी थी। अलार्म लगा कर सोया। लेकिन उस दिन नामी कंपनी की घड़ी का अलार्म ही नहीं बजा। मेरी फ्लाइट छूट गई। आर्थिक नुकसान तो हुआ, साख भी प्रभावित हुई। 
मनोज शर्मा, प्रोफेशनल

महंगा पड़ गया समझौता
पुरानी बात है। हम लोग घर के लिए फ्रिज लाए थे। दुकानदार ने एक नई कंपनी का सस्ता स्टेब्लाइजर दे दिया। एक दिन वोल्टेज में गिरावट हुई तो स्टेब्लाइजर अपनी भूमिका को पूरा नहीं कर सका। हमारे महंगे फ्रिज का कंप्रेसर चला गया। काफी नुकसान झेलना पड़ गया। 
कृष्ण मुरारी अग्रवाल, व्यवसायी

इंटरव्यू छूट गया
मुझे नई नौकरी के इंटरव्यू के लिए जाना था। लोकल बस में चढ़ा। शायद उसमें कहीं से कील निकली थी। स्टॉप आया, जब उठा तो पैंट उसमें उलझ कर फट गई। विषम परिस्थिति थी। मजबूरी में मुझे वह इंटरव्यू ही छोड़ना पड़ गया। मानकों का होना वाकई जरूरी होता है। 
असलम परवेज, प्रोफेशनल

क्रिकेट हेलमेट ने छीन ली आंख
एक प्रशासनिक अधिकारी स्टेडियम आया करते थे। एक दिन नेट प्रेक्टिस के दौरान बॉल हेलमेट की जाली को पार करते हुए उनकी आंख में जा लगी। काफी इलाज कराया लेकिन आंख नहीं बच सकी। मानकों से समझौते ने जीवन की अनमोल धरोहर को छीन लिया।
मनोज कुशवाह, क्रिकेट कोच

30 फीसदी तक सब स्टैंडर्ड
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि कुछ लोग बार-बार आगाह करने भी मानकों का पालन नहीं करते। बीती अवधि में जिन उत्पादों के नमूने भरे गए, उनकी जांच में लगभग 30 फीसदी सब स्टैंडर्ड पाए गए। 

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